
वंदेभारतलाइवटीव न्युज, मंगलवार 10 मार्च 2026
====-: जानकारी अनुसार पुराने वाहनों को देश के एक राज्य से दूसरे अन्य राज्य में ट्रांसफर करना अब और आसान हो सकता है केंद्र सरकार देश के दूसरे राज्य में वाहन के ट्रांसफर करने पर लगने वाले ‘नो ऑब्जेक्शन” सर्टिफिकेट की अनिवार्यता को समाप्त कर सकती है। प्राप्त जानकारी अनुसार इसके लिए नीति आयोग की एक हाई लेवल कमेटी ने परिवहन मंत्रालय को प्रस्ताव भी भेजा है। सरकार पंद्रह साल पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेशन के नियमों में भी परिवर्तन कर सकती है। मोटर व्हीकल एक्ट 1988 सेक्शन 47 के अनुसार किसी भी राज्य में एक साल तक दूसरे राज्य के वाहन को चला सकते हैं, एक साल के अंदर नये राज्य में अपने वाहन को रजिस्टर्ड करना पड़ता है, और इसके लिए पुराने आरटीओ से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लाना भी आवश्यक होता है। इसके लिए हर राज्य में इसके लिए अलग अलग तरीके हैं, अलग अलग दस्तावेज भी लगते हैं। जिसमें वाहन रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट, फिटनेस सर्टिफिकेट, टैक्स की रसीद आदि दस्तावेज शामिल हैं। इन दस्तावेज से यह पता चलता है कि वाहन पर कोई टैक्स आदि बकाया तो नहीं है, या कई अपराधिक मामला तो नहीं है इन सबके बिना देश के दूसरे अन्य राज्य में वाहन का रजिस्ट्रेशन संभव नहीं हो पाता है। यह सर्टिफिकेट आमतौर पर पुराने वाहनों को खरीदने बेचने के समय काम आता है। नीति आयोग की हाई लेवल कमेटी ने सुझाव दिया कि एनओसी के बदले ऑटो जनरेटेड क्लीयरेंस सिस्टम को शुरू किया जा सकता है। जानकारी के अनुसार अब सभी वाहनों का डेटा वाहन के सेंट्रलाइजड डिजिटल डेटाबेस मे उपलब्ध हैं, इसलिए एक राज्य का दूसरे अन्य राज्य के वाहन का रिकॉर्ड भी खुद ही चेक कर सकता है। पेंडिंग चालान, टैक्स, या अन्य किसी प्रकार का बकाया होने की जानकारी भी ऑटोमोटिक रूप से वेरिफाई भी हो जायेगी। इससे वाहन मालिक को फिजिकली नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेने के लिए पुराने आरटीओ दफ्तर के चक्कर नहीं लगाने पड़ेगे। जानकारी अनुसार कमेटी ने यह भी सुझाव दिया कि अब वाहनों को उनकी उम्र के आधार पर सड़क पर हटाने के बदले वाहनों की फिटनेस देखी जा सकती है। कमेटी का यह भी मानना है कि उम्र पर आधारित रोकटोक के कारण कई बार अच्छी हालत वाले वाहनों को अवैध/ कबाड़ घोषित कर दिया जाता है। इसके बदले सख्त फिटनेस जांच प्रणाली को लागू किया जाये तो सुरक्षित फिट कॉमर्शियल वाहन भी उम्र की सीमा पार करने के बाद भी सड़क पर चल सकेंगी।








